JOHAR HULGẠRIẠKO!
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संघर्ष करना आसान है पर उसके द्वारा प्राप्त होने वाले फल को संभाल पाना कठिन है यह जगजाहिर है कि कोई भी चीज हाथ में आने के बाद उसकी कीमत शून्...
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संताली साहित्य का भविष्य यह सौ प्रतिशत सच है कि संतालों में संताल हूल-1855 तक एक भी पढ़ा-लिखा व्यक्ति मौजूद नहीं था। तात्पर्य यही है कि किसी ...
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हमारी पहचान है या विनाश की फाँस? अगर दुनिया में लिपि ही किसी समुदाय विशेष की पहचान होती, तो आज अंग्रेज ही दुनिया के महामूर्ख कहलाते। यही वे ...
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अदृश्य समस्याएं मंगरु आज जितना उदास है, शायद ही वह पहले कभी हुआ हो। वह अत्यंत दुःखी है। दुःखी इसलिए कि अब तक जिस गति से उसके समाज को शिक्ष...