JOHAR HULGẠRIẠKO!
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संघर्ष करना आसान है पर उसके द्वारा प्राप्त होने वाले फल को संभाल पाना कठिन है यह जगजाहिर है कि कोई भी चीज हाथ में आने के बाद उसकी कीमत शून्...
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हमारी पहचान है या विनाश की फाँस? अगर दुनिया में लिपि ही किसी समुदाय विशेष की पहचान होती, तो आज अंग्रेज ही दुनिया के महामूर्ख कहलाते। यही वे ...
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संताली साहित्य का भविष्य यह सौ प्रतिशत सच है कि संतालों में संताल हूल-1855 तक एक भी पढ़ा-लिखा व्यक्ति मौजूद नहीं था। तात्पर्य यही है कि किसी ...
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BOḌIṄ MÃHÃ DINISẠ (02 No̱be̱mbo̱r, 1865) Cando Babawak̕ ạḍi hahaṛa sirjo̱n! Pilcu Haṛam-Buḍhi kho̱n nit hạbic̕te ạḍi lekan man...