JOHAR HULGẠRIẠKO!
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संघर्ष करना आसान है पर उसके द्वारा प्राप्त होने वाले फल को संभाल पाना कठिन है यह जगजाहिर है कि कोई भी चीज हाथ में आने के बाद उसकी कीमत शून्...
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1932 खतियान: आदिवासी-मूलवासियों की पहचान (संताल परगना के संदर्भ में) यह विडंबना ही है कि युद्ध शांति के लिए अथवा शांति के लिए युद्ध किया जात...
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डूबता जहाज या नूह की नाव? सिदो-बिरसा के सपने को साकार करने हेतु आदिवासियों ने माराङ गोमके के नेतृत्व में जिस झारखण्ड पार्टी का गठन किया था, ...
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कैसी और किसकी आजादी? वाइरल हो रहे एक वीडियो "ईसावाद और औपनिवेशिक कानूनों के चक्रव्यूह में" को बड़े ध्यान से सुना। इस पर गहराई के स...