कैसी और किसकी आजादी?
वाइरल हो रहे एक वीडियो "ईसावाद और औपनिवेशिक कानूनों के चक्रव्यूह में" को बड़े ध्यान से सुना। इस पर गहराई के साथ मनन-चिंतन किया। सार स्वरुप यही समझ में आया कि यह वीडियो संघ परिवार के थिंक टैंक द्वारा प्रायोजित है। इस रहस्य को समझने के लिए इतना ही काफी है कि एक छोटा-सा ”दीया“ जिसके बमुश्किल संसद में एकाध सांसद ही हुआ करते थे, आज सत्ता की बागडोर उनके हाथ में है। जिनकी रगों में "हिन्दी, हिन्दु, हिन्दुस्तान" का खून दौड़ रहा हो, आज उसके सपने "प्राण प्रतिष्ठा" आयोजित कर पूर्ण होता दिखाई दे रहा है।
उपरोक्त वीडियो के मनगढ़ंत कहानी के झूठे ब्यानों पर बहुत कुछ कटाक्ष किया जा सकता है। पर इस कहानी की जड़ को समझने के लिए उस कथावाचक के इन शब्दों के तह तक जाने की जरुरत है यथा - अंग्रेज, ईसाई, भारत का स्वतंत्रता आंदोलन, छोटानागपुर एवं संताल परगना काश्तकारी अधिनियम एवं वनवासी।
तथाकथित कथावाचक ने अपनी चिकनी-चुपड़ी बातों को बड़े ही शालीनता के साथ पिरोया है। उनकी बातों से ऐसा प्रतीत होता है; मानो, वे किसी कब्रगाह की रंगाई-पुताई कर रहे हों। उनके मुँह में राम-राम, तो बगल में एक धारदार छुरी छिपी हुई है। सच कहा जाय तो उसने एक सच को छिपाने के लिए सैकड़ों झूठ का सहारा लिया है। उनकी कथनों में दूर-दूर तक कोई सच्चाई नहीं है। इस वीडियो में कही गई बातों के रहस्य को समझने के लिए इसके पर्दे के पीछे चल रहे खेल को अच्छी तरह समझना बहुत जरुरी है।
किसी भी रहस्य को समझने के लिए हमेशा तीसरी आँख की जरुरत होती है। जब तक गहराई के साथ उस रहस्य पर अन्वेषण न किया जाए, तो ऊपरी सतह पर वह आपको सच-सा ही प्रतीत होगा। क्या आप बता सकते हो; भारतीय स्वतंत्रता का आंदोलन क्यों चलाया गया? क्यों भारतवासी इस जंग में एकजूट हो गए? निःसंदेह आपका उत्तर होगा - "क्योंकि तब भारत देश अंग्रेजों के अधीन था। हम भारत के लोग गुलाम थे। इसलिए आजादी की लड़ाई लड़ी गई।" पर आपका यह उत्तर सच्चाई से कोसों दूर है। अगर पूछा जाय, अंग्रेजों से पहले भी तो बाहर के देशों से कई मुगल, लोदी, पठान आदि आए और इस देश में सदियों तक राज किए। तब क्यों नहीं भारतीय स्वतंत्रता का आंदोलन हुआ? क्या कारण था कि सिर्फ अंग्रेजों के दौरान ही आजादी का बिगुल फूंका गया? इसका सही जवाब के लिए पहले - "आजादी, स्वतंत्रता, स्वावलंबन" के अर्थ, अभिप्राय, भावार्थ आदि को अच्छी तरह समझना होगा। कैसी आजादी? किस तरह की स्वतंत्रता? क्या एक राजा के बदले दूसरे राजा को बैठा देने मात्र से ही आपकी तमाम समस्याओं का समाधान हो गया? शायद नहीं। बल्कि हमारी समस्या और बढ़ गई। खैर, हमारे लिए तो सावन हरे न भादो सूखे। हम तो आसमान से गिरे और खजूर पर अटक गए हैं।