Wednesday, 1 May 2024

 कथनी और करनी ...

"कोशिश करने पर भी अगर सफलता न मिलती हो, तो समझो कोशिश करने में कोई खोट अवश्य है।" यह सिद्धांत हम संतालों के विकास में अक्षरशः लागू होता है, नहीं तो क्या कारण हे कि तीन-तीन बार अलग प्रदेश मिलने के बावजूद भी मुल्ला की दौड़ मस्जिद तक ही सीमित रही। संताल हूल के परिणामस्वरुप संताल परगना मिला, भारत देश गुलामी से आजाद हुआ और आज से ठीक 24 वर्ष पूर्व अलग झारखण्ड राज्य भी मिला। फिर भी खोदा पहाड़ निकली चुहिया, वह भी मरी हुई। इसका मतलब हमारी कोशिश में कोई न कोई खोट अवश्य रहा होगा।

चुनावी मौसम है, अतः सोशल मीडिया में राजनीति पर बरसाती मेढ़कों का टर्र-टर्र होना स्वाभाविक है। राजनीति एवं राजनीतिज्ञों पर चर्चा करना लाजिमी हो जाता है। घर बैठे सोशल मीडिया पर राजनीति के बारे सुतर्क-कुतर्क करना अंतःमन की खुजली को अवश्य मिटा देता है। लेकिन, ध्यान रहे, उन्हें इंगित करने पर तीनों उंगलियां अपनी ही ओर इशारा कर रही हैं। 

इस चुनावी मौसम में राष्ट्र के बड़े-बड़े नेता इधर से उधर पल्टी मार रहे हैं। हम झारखण्डी नेता उनके सामने किस खेत की मूली हैं? उनकी आंच हम पर भी पड़ेगी, निश्चित है। लोबिन हेम्बरो़म, सीता सोरेन सरीखे नेताओं की उनकी अपनी मजबूरी होगी। वे गये, तो कौन-सा पहाड़ टूट गया? हमारे मतदाताओं को किस श्रेणी में रखा जाय? यह एक अति विचारणीय तथ्य है। क्या वे देश-दुनिया की समस्याओं से वाकिफ हैं? क्या उन्हें आपनी खुद की समस्या के बारे में कुछ पता है? शायद नहीं। जिस एसपीटी एक्ट के बारे में हम दहाड़ मार रहे हैं, क्या हमारे मतदाताओं को उससे कोई सरोकार है? उस एक्ट के बारे में अगर उन्हें खाक भी पता न हो, पर उन्हें यह तो अच्छी तरह पता है कि संतालों की जमीन न तो वे (संताल) बेच सकते हैं और न ही कोई गैर संताल उनकी जमीन को खरीद सकता है। फिर भी संतालों ने अब तक अपनी आधी जमीन को बेच चुका है। क्यों? लैण्ड पुलिंग से मतदाता वाकिफ हैं अथवा नहीं, क्या पता।  सार यही है कि हम संताल सिर्फ एक समस्या से जूझ रहे हैं, ऐसी बात नहीं है। हमारी हजार तरह की समस्याएं हैं। सर्वप्रथम किस समस्या को सुलझाया जाय, इसकी प्राथमिकता निर्धारित करना अति कठिन कार्य है। तीर-धनुष चले या कमल फूल खिले हमारे नादान वोटर्स को क्या फर्क पड़ता है। उन्हें तो "खायेंगे-पीयेंगे और मस्तपूर्वक जीयेंगे" से फुर्सत ही कहाँ?

समय के साथ बहुत कुछ बदल चुका है। सिर्फ व्हाट्सअप पर उंगली फेर देने मात्र से कुछ नहीं होने वाला है। राजनीति पर बहस जरुरी है। पर इस पर मनमुटाव गलत है। कहने के लिए बड़ी-बड़ी बातें कही जा सकती हैं, पर उसे धरातल पर ला सकना उससे भी और कठिन कार्य है। कहा गया है कि कथनी और करनी में जमीन-आसमान का फर्क है। हेल्दी बहस जारी रहे, इससे सुदूर बैठे मंगरुओं का ज्ञानवर्धन होते रहता है।

लोकसभा चुनाव-2024
(अपना कीमती वोट किसे दें?)

(दुमका-राजमहल लोकसभा क्षेत्र। यह मात्र एक विश्लेषण है। इस विश्लेषण का उद्देश्य किसी वोटर को जबरन किसी दल विशेष को मत देने का आह्वन कतई नहीं है। यह विश्लेषण "सुनो सबकी, करो मनकी" सिद्धांत पर आधारित है।)

एनडीए गठबंधन - भाजपा इस गठबंधन के प्रमुख दलों में से एक है। भाजपा का पुराना नाम जनसंघ है। 1980 दशक में यह दल समय की मांग को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी के नाम से उभर कर सामने आया। इस पार्टी पर हमेशा संप्रदायिक होने का आरोप लगते रहा है। इसका एकमात्र कारण है कि इनके मूल सिद्धांतों में हिंदी, हिंदु, हिंदुस्तान का नारा सर्वोपरी है। 

भाजपा 10 वर्षों से केन्द्र में सत्ता पर काबिज है। इसने "सबका साथ सबका विकास" के नारा के  साथ-साथ 2 करोड़ नौकरी देने एवं सस्ते पेट्रोल-डीजल देने सहित कई तरह के वादे किए थे। यह पार्टी हमेशा हिंदु-मुस्लिम करती रही है। भाजपा ने इन दस वर्षों में विकास के नाम पर एक ढेले का काम नहीं किया है। वह अपने काम पर वोट नहीं मांग रही है। बल्कि इनके प्रमुख हिंदु-मुस्लिम, मंगलसूत्र, गाय-बैल एवं भैंस के नाम पर वोट मांग रही है।

भाजपा संविधान को खत्म करना चाहती है। भाजपा आरक्षण का घोर विरोधी है। यह आदिवासी, दलितों एवं अल्पसंख्यकों को गर्त्त में ले जाना चाहती है। सीधे तौर पर कहें, तो भाजपा एसटी/एससी/ओबीसी को अपना गुलाम बनाना चाहती है।

भाजपा की ओर से दुमका में सीता सोरेन को प्रत्याशी बनाया गया है। आप दिवंगत दुर्गा सोरेन की धर्मपत्नी है। सीता सोरेन माननीय शिबू सोरेन की बड़ी पुत्रवधू है। आप 15 वर्षों से जामा विधानसभा से विधायक रही हैं। आपने झामुमो से बगावत कर दी है एवं सीटिंग सांसद सुनील सोरेन के मुंह से भाजपा की टिकट छीनकर खुद मैदान में आ डटी हैं। आप शिबू सोरेन परिवार से बदला लेने के लिए जनता से वोट मांग रही हैं। 

निर्दलीय उम्मीदवार - राजमहल लोकसभा क्षेत्र से पंद्रह प्रत्याशी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं। एक को छोड़ बाकीयों की जमानत रद्द हो जाएगी। एक निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में हैं। आप वर्तमान में बोरियो विधानसभा से झामुमो के विधायक हैं। बोरियो में आप 25 वर्षों से विधायक एवं एक बार मंत्री भी रह चुके हैं। राजनीतिक नशा के कारण आपने राजमहल लोकसभा से झामुमो से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। पर झामुमो हाईकमान ने आपकी मांग को ठुकरा दी। आपने पार्टी की आज्ञा का उल्लंघन किया और आपको पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है। फिर भी आप बागी उम्मीदवार के रूप में डटे हुए हैं। आप पर भाजपा की बी टीम होने का संगीन आरोप है। आप वोट कटुआ ही साबित होंगे।

इंडिया गठबंधन - इस गठबंधन में कांग्रेस/झामुमो सहित कई अन्य कई दल शामिल हैं। इस वक्त देश इंडिया गठबंधन के साथ खड़ा है। इंडिया गठबंधन संविधान एवं आरक्षण बचाने के साथ-साथ "हिंदु, मुस्लिम, सिख, ईसाई; हम सभी हैं भाई-भाई" की बात कर रहा है। जिसकी वजह से नौकरी पेशा, व्यापारी, किसान, मजदूर सभी इसके पक्ष में आ गए हैं।

आप किसको अपना कीमती वोट देंगे? यह आप पर निर्भर करता है। 

संघर्ष करना आसान है पर उसके द्वारा प्राप्त  होने वाले फल को संभाल पाना कठिन है यह जगजाहिर है कि कोई भी चीज हाथ में आने के बाद उसकी कीमत शून्...