Tuesday, 2 January 2024

 कैसी और किसकी आजादी (5)?

संताल संताल परगना में प्रवेश तो कर गए पर वे देश-दुनिया की खबरों से अनभिज्ञ थै। हां, उन्होंने सिर्फ किसी ”कुपनी“ (ईस्ट इण्डिया कंपनी) का नाम अवश्य सुन रखा था। पर वे उनकी कार्यशैली से कोसों दूर थे। तब संताल अपने में मस्त होकर बड़े आनंद के साथ अपना जीवनयापन कर रहे थे। ब्रिटिश काल में इनके साथ घटी घटनाओं को हम बाद में जानेंगे। इससे पहले हम भारत में अंग्रेजों द्वारा किए गए कार्यों को संक्षेप में जानने की कोशिश करते हैं। अंग्रेजों द्वारा खासकर दलितों के लिए किए गए कार्यों का विवरण कुछ इस तरह है:-

1. अंग्रेजों ने 1795 में अधिनियम 11 द्वारा शूद्रों को भी संपत्ति रखने का कानून बनाया।

2. 1773 में ईस्ट इण्डिया कंपनी ने रेगुलेटिंग एक्ट पास किया, जिसमें न्याय व्यवस्था समानता पर आधारित थी। 6 मई 1775 को इसी कानून के तहत बंगाल के सामंत ब्राह्मण नन्द कुमार देव को फांसी की सजा दी गई।

3. 1804 अधिनियम 3 द्वारा अंग्रेजों ने कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाई (लड़कियों के पैदा होते ही तालु में अफीम चिपका कर, मां के स्तन पर धतूरे का लेप लगाकर एवं गड्ढा बनाकर उसमें दूध भरकर डूबो कर मारा जाता था।)।

4. 1813 में ब्रिटिश सरकार ने कानून बनाकर शिक्षा ग्रहण करने का सभी जातियों और धर्मों के लोगों को अधिकार दे दिया।

5. 1813 में अंग्रेजों ने कानून बनाकर दास प्रथा का अंत कर दिया।

6. 1817 में अंग्रेजों ने समान नागरिक संहिता कानून बनाया (1817 के पहले सजा का प्रावधान वर्ण के आधार पर था। ब्राह्मण को कोई सजा नहीं होती थी, बल्कि शूद्र को कठोर दण्ड दिया जाता था। अंग्रेजों ने सजा प्रावधान समान कर दिया।)।

7. 1819 में अधिनियम 7 द्वारा ब्राह्मणों द्वारा शूद्रों के शुद्धिकरण पर रोक लगाई। (शूद्रों की शादी होने पर दुल्हन को अपने दूल्हे के घर न जाकर कम से कम तीन रात ब्राह्मण के घर शारीरिक सेवा देनी पड़ती थी।)

8. 1830 नरबलि प्रथा पर रोक लगा दिया। (देवी-देवता को प्रसन्न करने के लिए ब्राह्मण शूद्रों, स्त्री व पुरुष दोनों को मंदिर में सिर पटक-पटक कर चढ़ा देता था।)।

9. 1833 अधिनियम 87 द्वारा सरकारी सेवा में भेदभाव पर रोक अर्थात् योग्यता ही सेवा का आधार स्वीकार किया गया तथा कंपनी के अधीन किसी भारतीय नागरिक को जन्म स्थान, धर्म, जाति या रंग के आधार पर पद से वंचित नहीं रखा जा सकता है।

10. 1834 में पहला भारतीय विधि आयोग का गठन हुआ। कानून बनाने की व्यवस्था जाति, वर्ण, धर्म और क्षेत्र की भावना से ऊपर उठकर करना आयोग का प्रमुख उद्देश्य था।

11. 1835 प्रथम पुत्र को गंगा दान पर रोक लगा दिया। (ब्राह्मणों ने नियम बनाया कि शूद्रों के घर यदि पहला बच्चा लड़का पैदा हो, तो उसे गंगा में फेंक देना चाहिए। पहला पुत्र हृष्ट-पुष्ट ब्राह्मणों से लड़ न पाए, इसलिए उसे पैदा होते ही गंगा को दान करवा देते थे।)

12. 7 मार्च 1835 को लॉर्ड मैकाले ने शिक्षा नीति को राज्य का विषय बनाया और उच्च शिक्षा को अंग्रेजी भाषा का माध्यम बनाया।

13. 1835 को कानून बनाकर अंग्रेजों ने शूद्रों को कुर्सी पर बैठने का अधिकार दिया।

14. दिसम्बर 1829 के नियम 17 द्वारा विधवाओं को जलाना अवैध घोषित कर सती प्रथा का अंत किया।

15. देवदासी प्रथा पर रोक लगाई। ब्राह्मणों के कहने से शूद्र अपनी लड़कियों को मंदिर की सेवा के लिए दान देते थे। मंदिर के पुजारी उनका शारीरिक शोषण करते थे। बच्चा पैदा होने पर उसे फेंक देते थे और उस बच्चे को “हरिजन” नाम देते थे।

1921 को जातिवार जनगणना के आंकड़े के अनुसार अकेले मद्रास में कुल जनसंख्या 4 करोड़ 23 लाख थी, जिसमें 2 लाख देवदासियां मंदिरों में पड़ी थी। यह प्रथा अभी भी दक्षिण भारत के मंदिरों में चल रही है।

16. 1837 अधिनियम द्वारा ठगी प्रथा का अंत किया।

17. 1849 में कलकत्ता में एक बालिका विद्यालय जे. ई. डी. बेटन ने स्थापित किया।

18. 1854 में अंग्रेजों ने 3 विश्वविद्यालय कलकत्ता, मद्रास और बॉम्बे में स्थापित किया। और 1902 में विश्वविद्यालय आयोग नियुक्त किया।

19. 6 अक्टूबर 1860 को अंग्रेजों ने इण्डियन पैनल कोड-प्च्ब् बनाया। लार्ड मैकाले ने सदियों से जकड़े शूद्रों की जंजीरों को काट दिया और भारत में जाति, वर्ण और धर्म के बिना एक समान क्रिमिनल लॉ लागू कर दिया।

20. 1863 में अंग्रेजों ने कानून बनाकर चरक पूजा पर रोक लगा दिया। (आलिशान भवन एवं पुल निर्माण पर शूद्रों को पकड़कर जिन्दा चुनवा दिया जाता था। इस पूजा में मान्यता थी कि भवन और पुल ज्यादा दिनों तक टिकाऊ रहेंगे।)

21. 1867 में बहुविवाह प्रथा पर पूरे देश में प्रतिबंध लगाने के उद्देश्य से बंगाल सकार ने एक कमिटि गठित किया।

22. 1871 में अंग्रेजों ने भारत में जातिवार गणना प्रारंभ की। यह जनगण्ना 1941 तक हुई। 1948 में पण्डित नेहरु ने कानून बनाकर जातिवार गणना पर रोक लगा दी।

23. 1872 में सिविल मैरिज एक्ट द्वारा 14 वर्ष से कम आयु की कन्याओं एवं 18 वर्ष से कम आयु के लड़कों का विवाह पर रोक लगाई।

24. अंग्रेजों ने महार और चमार रेजिमेंट बनाकर इन जातियों को सेना में भर्ती किया, लेकिन 1892 में ब्राह्मणों के दबाव के कारण सेना में अछूतों की भर्ती बन्द हो गई।

25. रैयत वाणी पद्धति अंग्रेजों ने बनाकर प्रत्येक पंजीकृत भूमिदार को भूमि का स्वामी स्वीकार किया।

26. 1918 में साऊथबरो कमेटी को भारत में अंग्रेजो ने भेजा। यह कमेटी भारत में सभी जातियों का विधि मण्डल (कानून बनाने की संस्था) में भागीदारी के लिए आया। शाहू जी महाराज के कहने पर पिछड़ों के नेता भाष्कर राव जाधव एवं अछूतों के नेता डॉ. अम्बेडकर ने अपने लोगों को विधि मण्डल में भागीदारी के लिए मेमोरेंडम/ज्ञापन दिया।

27. अंग्रेजों ने 1919 में भारत सरकार अधिनियम का गठन किया।

28. 1919 में अंग्रेजों ने ब्राह्मणों को जज बनने पर रोक लगा दी थी और कहा था कि इनके अंदर न्यायिक चरित्र नहीं होता है।

29. 25 दिसम्बर 1927 को डॉ. अम्बेडकर द्वारा मनुस्मृति का दहन किया गया। मनुस्मृति में शूद्रों और महिलाओं को गुलाम तथा भोग की वस्तु समझा जाता था, एक पुरुष को अनगिनत शादियां करने का धार्मिक अधिकार है, महिला अधिकार विहीन तथा दासी की स्थिति में थी। एक-एक औरत के अनगिनत सौतनें हुआ करती थीं। औरतों-शूद्रों के लिए सिर्फ और सिर्फ गुलामी लिखा है, जिसको ब्राह्मण मनु ने धर्म का नाम दिया है।

30. 1 मार्च 1930 को डॉ. अम्बेडकर द्वारा काला राम मंदिर (नासिक) प्रवेश का आंदोलन चलाया गया।

31. 1927 को अंग्रेजों ने कानून बनाकर शूद्रों के सार्वजनिक स्थानों पर जाने का अधिकार दिया।

32. 1927 में साईमन कमीशन की नियुक्ति की जो 1928 में भारत के अछूत लोगों की स्थिति का सर्वे करने और उनको अतिरिक्त अधिकार देने के लिए आया। भारत के लोगों को अंग्रेज अधिकार न दे सके, इसलिए इस कमीशन के भारत पहुंचते ही गांधी और लाला लाजपत राय ने इस कमीशन के विरोध में बहुत बड़ा आंदोलन चलाया। जिस कारण साईमन कमीशन अधूरी रिपोर्ट लेकर वापस चला गया। इस पर अंतिम फैसले के लिए अंग्रेजों ने भारतीय प्रतिनिधियों को 12 नवम्बर 1930 को लंदन गोलमेज सम्मेलन में बुलाया।

33. 24 सितम्बर 1932 को अंग्रेजों ने कम्ययुनल अवार्ड घोषित किया, जिसमें निम्न प्रमुख अधिकार दिये:-

ंद्ध वयस्क मताधिकार

इद्ध विधान मण्डलों और संघीय सरकार में जनसंख्या के अनुपात में अछूतों को आरक्षण का अधिकार

बद्ध सिक्ख, ईसाई और मुसलमानों की तरह अछूतों ;ैब्ध्ैज्द्ध को भी स्वतंत्र निर्वाचन के क्षेत्र का अधिकार मिला। जिन क्षेत्रों में अछूत प्रतिनिधि खड़े होंगे, उनका चुनाव केवल अछूत ही करेंगे।

कद्ध प्रतिनिधियों को चुनने के लिए दो बार वोट देने का अधिकार मिला, जिसमें एक बार सिर्फ अपने प्रतिनिधियों को वोट देंगे तो दूसरी बार सामान्य प्रतिनिधियों को वोट देंगे।

34. 19 मार्च 1928 को बेगारी प्रथा के विरुद्ध डॉ. अम्बेडकर ने मुम्बई विधान परिषद में आवाज उठाई, जिसके बाद अंग्रेजों ने इस प्रथा को समाप्त कर दिया।

35. अंग्रेजो ने 1 जुलाई 1942 से लेकर 10 सितम्बर 1946 तक डॉ. अम्बेडकर को वायसराय की कार्य साधक कौंसिल में लेबर मेम्बर बनाया। लेबरों को डॉ. अम्बेडकर ने 8.3 प्रतिशत प्रतिनिधित्व दिलवाया।

36. 1937 में अंग्रेजों ने भारत में प्रोविंशियल गवर्नमेंट का चुनाव करवाया।

37. 1942 में अंग्रेजों से डॉ. अम्बेडकर ने 50 हजार हेक्टेयर भूमि को अछूतों एवं पिछड़ों में बांट देने के लिए अपील किया। अंग्रेजों ने 20 वर्षों की समय सीमा तय किया था।

38. अंग्रेजों के शासन प्रशासन में ब्राह्मण की भागीदारी को 100 से 2.5 पर लाकर खड़ा कर दिया था।

इन्हीं सब कारणों से ब्राह्मणों ने अ्रंग्रेजों के खिलाफ क्रांति शुरु कर दी। क्योंकि अंग्रेजों ने शूद्रों और महिलाओं को सारे अधिकार दे दिये थे और सब जातियों के लोगों को एक समान अधिकार देकर सबको बराबरी में लाकर खड़ा कर दिया था। 

(... अगले अंक में जारी।)

संघर्ष करना आसान है पर उसके द्वारा प्राप्त  होने वाले फल को संभाल पाना कठिन है यह जगजाहिर है कि कोई भी चीज हाथ में आने के बाद उसकी कीमत शून्...