डूबता जहाज या नूह की नाव?
सिदो-बिरसा के सपने को साकार करने हेतु आदिवासियों ने माराङ गोमके के नेतृत्व में जिस झारखण्ड पार्टी का गठन किया था, वह आंधी की तरह आया और तूफान की तरह चल बसा। कुछ आदिवासी शुभचिंतकों ने अलग प्रांत की मांग को जिंदा रखने की कोशिश की पर वे असफल रहे। फिर 1970 के दशक में गुरुजी का उदय हुआ। आप आदिवासी भावनाओं के साथ क्रीड़ा करने में सफल रहे। झारखण्ड आंदोलन का उतार-चढ़ाव होते रहा। लेकिन आश्चर्य तो तब हुआ जब आदिवासियों को अपना सपने का अलग प्रांत नसीब नहीं हुआ। फूलवालों ने इस मांग का अपहरण कर लिया। और इस तरह अलग झारखण्ड राज्य 15 नवंबर, 2000 को मिला। लेकिन खोदा पहाड़ निकली चुहिया, वह भी मरी हुई।
झारखण्ड मिले 24 वर्ष बीत चुके हैं। इस दौरान की कहानी आपके सामने है। यह सच है कि सिदो-बिरसा का सपना चकनाचूर हो गया। इसके लिए हमारे नेताओं को जितना दोष दिया जाय कम है। लेकिन इसके लिए हम भी कम जिम्मेवार नहीं हैं। हम वोट के बदले नोट एवं हँडिया-दारू के अत्यधिक लती व आदी हो चुके हैं। इस वक्त सभी सरकारी तंत्र भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हुए हैं। हर तरफ घूसखोरी का आलम है। माफियाओं का राज कायम है। बेचारी झारखण्डी जनता बेमौत मरी जा रही है। वह नरक में जीने को मजबूर है।
आजकल झामुमो जिसकी राज्य में गठबंधन सरकार चल रही है, उसके बारे में जितने मुंह उतनी बातें हो रही हैं। कोई कह रहा है झामुमो एक डूबता जहाज है। सवारी कूदकर अपनी जान बचा रहे हैं। लेकिन इतिहास साक्षी है; जो भी इस जहाज से कूदा, वह मर-खप गया। या यों कहें की वह विलीन हो गया। कोई कह रहा है चिंटू-पिंटूओं ने झामुमो का हैजाक कर रखा है। आरोप-प्रत्यारोप लगाना बहुत आसान है। बांझ क्या जाने प्रसव की पीड़ा? नई पार्टी बनाना इतना आसान नहीं है।
आज वो देखो कोल्हन का शेर तथाकथित डूबता जहाज से कूद गया है। लेकिन कूदकर वह जिस दूसरे जहाज में सवार हो रहा है, वह तो इससे भी बड़ा खतरनाक है। अब उसका चड्डी-बनियान भी छीना जायगा। खासकर इस वक्त अगर आदिवासियों को धीमा जहर दिया जा रहा है, तो अब उनकी दिन-दहाड़े कत्लेआम होगी। अतः इस नादान मंगरु की सलाह यही है कि हो सकता है कि आपका भवन पुराना हो गया हो, इसे मरम्मत की जरूरत है। इतने आच्छादित मकान को क्यों तोड़ने के लिए लालायित हो रहे हो? नया आशियाना बनाना बहुत मुश्किल है। और दूसरा घर जहां जा रहे हो वह डाकुओं का बसेरा है। वहाँ आपका पनाह लेना खतरे से खाली नहीं होगा। अतः इस परिस्थिति में झामुमो डूबता जहाज है अथवा नूह की नाव? इस पर मंथन करना आपका कर्तव्य है।
No comments:
Post a Comment