Thursday, 2 May 2024

"अफीम" की खेती को नष्ट करो

कहा जाता है; भाजपा केन्द्र में नफराती करतूतों एवं जनता को धार्मिक "अफीम" का घूंट पिलाकर सत्ता में आई थी। शुरुआती दौर में इस पार्टी का नाम जनसंघ था। इनका चुनाव चिन्ह "दीया" था जो अब "कमल फूल" में तब्दील होकर भाजपा के रूप में विकसित हो गई है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक भाजपा की रीढ़ मानी जाती है। भाजपा ने देश में धार्मिक उन्माद फैलाया, हिन्दु-मुसलमान करते रहा और इस तरह देश को एक जलती भट्टी में झोंक दिया। सार यही है कि भाजपा ने धर्म की आड़ में देश का सत्यानाश कर रखा है। लोगों का आरोप है कि इव्हीएम ने सत्तासीन लोगों की खूब मदद की है। लोग तो इतना तक कहते सुने गए हैं कि ईव्हीएम की चोरी में दस वोट डालो तो छः वोट भाजपा की झोली में जाना तय माना जाता है। यह सिलसिला विगत दस वर्षों से चला आ रहा है। अब देश की जनता ने मन बना लिया है कि ऐसी तानाशाह सरकार को जड़ से उखाड़ फेंकने में ही भलाई है।

इतिहास बताता है कि जब से देश में लोकतंत्र के तहत मतदान की प्रक्रिया चली आ रही है, तब से झारखण्ड खासकर संताल परगना के आदिवासियों को चुनाव की महत्ता समझ में आई है। जनता बहुत दिनों तक "दीया" तो दूर "कमल फूल" से अनभिज्ञ थी, पर वे "मुर्गा", "जोड़ा पत्ता" हो या "तीर-धनुष" उनको अच्छी तरह पहचानती है।

थोड़ी देर के लिए इतिहास में जो घटना घटी, उसे भूल जाओ। कारण, उसे याद कर आंसू बहाने से रंचमात्र भी कोई लाभ नहीं, बल्कि वर्तमान में जो कुछ भी हो रहा है, उस पर विशेष ध्यान देने की जरुरत है। पूरे देश में चुनाव का महापर्व है। अतः क्यों न इस पर कुछ चर्चा किया जाय?

दुमका लोकसभा 2024 (अजज) की सीट का ही आंकलन किया जाय। भाजपा ने इस सीट से सीटिंग सांसद सुनील सोरेन के हाथ में टिकट देने के बाद अब उस सीट से जेएमएम की बागी सीता मैया को अपनी धुलाई मशीन में नहलाने के बाद उम्मीदवार बना दिया है। ज्ञात हो कि सीता मैया 15 वर्षों तक अपने ससूर शिबू सोरेन की पार्टी जेएमएम की बैसाखी पर सत्ता सुख भोग चुकी है। कारण कुछ भी हो, पर भाजपा वालों को जेएमएम को तोड़ने के लिए सीता मैया से कोई दूसरा अच्छा उम्मीदवार नहीं दिखाई दिया। इसीलिए सुनील सोरेन के मुंह से रोटी छिनकर सीता मैया को दी गई है। ज्ञात हो कि दुमका में भी इंडिया गठबंधन एवं भाजपा के बीच ही मुकाबला है। बाकी सभी उम्मीदवार वोट कटुवे ही साबित होंगे। 

सीता मैया को जिस तरह विधानसभा जामा की जनता से कोई लेना-देना नहीं था, उसी तरह उन्हें दुमका लोकसभा की जनता से भी कोई सरोकार नहीं होगा। वह अपने परिवार की आपसी कलह को चुनावी मुद्दा बनाकर मैदान में कूद पड़ी है। उसने घोषणा कर रखी है कि जीत जाने पर वह अपने पतिदेव की रहस्मय मौत को सीबीआई से जांच करवायेगी। दूसरा वह भाजपा के हिन्दुत्व के मुद्दा को आगे बढ़ाएगी, तभी तो उसने जय श्रीराम का उद्घोष करते हुए पार्टी में प्रवेश किया है। अगर उसकी गाड़ी ठीक चल पड़ी, तो अपनी दोनों बेटियों के लिए जामा-दुमका आरक्षित रखी हुई है। दुमका के बाकी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो जाएगी।

कमोवेश दुमका-राजमहल का वोट पैटर्न वही रहेगा। अगर दोनों जगहों के उम्मीदवारों को देखा जाय, तो दुमका के जेएमएम उम्मीदवार नलिन सोरेन शिकारीपाड़ा से सातवीं बार विधायक रहे हैं। जबकि सीता मैया भी तीसरी बार जेएमएम से जामा की विधायक रही हैं। दूसरी ओर राजमहल लोकसभा से जेएमएम के उम्मीदवार विजय हाँसदाक् हैट ट्रिक लगाने जा रहा है। वहीं भाजपा उम्मीदवार ताला मराण्डी भी एक बार बोरियो विधानसभा से भाजपा विधायक रह चुके हैं। इस क्षेत्र के जेएमएम के वर्तमान बागी विधायक लोबिन हेम्बरोम भी अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूर्ण करने हेतु निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में होंगे। इनका घमंड भी शीघ्र ही धराशायी हो जायेगा। यहाँ भी बाकी उम्मीदवरों की जमानत जब्त होगी।

सार यही है कि दुमका-राजमहल से जिन्हें धर्मनिरपेक्ष देश पसंद है, वे सभी इंडिया गठबंधन के उम्मीदवारों को जीताने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। और इस तरह "अफीम" की खेती को नष्ट कर देंगे।

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