Tuesday, 3 September 2024

शिक्षा रूपी मशाल दे दो!

ओशो ने ठीक कहा है - "राजनीति...! क्या ही सुंदर शब्द गढ़ा है लोगों ने “राजनीति!” जिसमें नीति बिलकुल भी नहीं है, उसको कहते हैं “राजनीति”। राजनीति सिर्फ चालबाजी है, धोखा-धड़ी है, लुटपाट है, बेईमानी है। इसकी खासियत यही है कि जो नेता जनता को जितना ठग सके, वह उतना ही कामयाब कहलाएगा। हालांकि राजनीतिज्ञों को ईमानदारी के नकाब ओढ़ने पड़ते हैं, मुखौटे ओढ़ने पड़ते हैं, अपने को छिपा-छिपा कर चलना पड़ता है। राजनीतिक नेताओं के पास जितने चेहरे होते हैं, उतने किसी के पास नहीं होते। उनको खुद ही पता नहीं होता है कि उसका असली चेहरा कौन-सा है। मुखौटे ही बदलते रहते हैं, गिरगिट की तरह।” जैसे कि हमारे झारखण्ड में इस वक्त कई तरह के गिरगिट उग आए हैं!

इस वक्त हमारे पास सबसे बड़ा सवाल क्या है? यही न कि हमें सिदो-बिरसा का झारखण्ड दे दो, कहानी खत्म, अध्याय समाप्त। सिदो-बिरसा ने हमें एस पी टी एवं सी एन टी एक्ट दिया। आपने हमें कौन-सा एक्ट दिया? बताओ जरा। इन तथाकथित राजनीतिज्ञों से डोमिसाइल नीति नहीं बन पा रही है, खतियान का बँटाधार हो चला है, पेसा एक्ट नहीं लागू हो रहा है। भ्रष्टाचार आसमान छू रहा है। फिर क्या दोगे? खाक दोगे? जब तक आरक्षण है, मजे लूटते रहो।

फ्री बी का जमाना चल पड़ा है। आपने चौरासी करोड़ जनता को भिखारियों की लाइन में खड़ा कर दिया है। आप भी खुश और जनता भी खुश! हिन्दू-मुस्लिम करते रहो, आबोआक्-आबोआक् करते रहो। किसने रोका है? आपकी गाड़ी चल रही है, चलाते रहो। हमें कुछ भी नहीं चाहिए। हमें शिक्षा रूपी मशाल दे दो। हम अपना रास्ता खुद-ब-खुद ढूँढ़ लेंगे।

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