Wednesday, 30 August 2023

कैसी और किसकी आजादी (2)?

इस विषय पर आगे बढ़ने से पहले यह जानना बहुत जारुरी है कि भारत के मूल निवासी कौन हैं? निःसंदेह भारत के मूल निवासी आदिवासी हैं। मानवशास्त्री बताते हैं कि आदिवासी आज से 65000 वर्ष पूर्व भारत आए। कल्पना करें, तब देश की क्या स्थिति रही होगी। भारत देश में तब कश्मीर से कन्याकुमारी तक किसी मानव प्राणी का कोई वास नहीं था। चूंकि वन-जंगलों में जीविका के लिए सबकुछ उपलब्ध था, अतः आदिवासियों ने अपने रहने के लिए वन-जंगलों को चुना। और वे वहीं के होकर रह गए। इस संबंध में दलित चिंतक बताते हैं कि आज से मात्र 4000 वर्ष पूर्व यूरेशिया महाद्वीप से कुछ लोग भारत आए। उन्होंने अपने ठिकाने के लिए मैदानी इलाके को चुना। ये यूरेशिया के लोग बड़े ही चालक एवं चतुर प्रवृति के प्राणी थे। उन्हें छल-कपट में महारथ हासिल था। भारत में आते ही उनका सामना आदिवासियों के साथ हुआ। आदिवासी सरल एवं मृदुल प्रवुति के थे। परंतु वे वीर और साहसी थे। स्वाभाविक था कि आदिवासी और यूरेशिया से आये हुए लोगों के बीच कई बार घमासन युद्ध हुआ। और इस भयंकर युद्ध में यूरेशिया के लोगों को हमेशा मुँह की खानी पड़ी थी। संक्षेप में यही कि फिर इन यूरेशियावासियों ने सुनियोचित तरीके से एक चाल चली। उन्होंने कपोल कल्पित ग्रंथ बेद, पुराण, उपनिषद, महाभारत, रामायण आदि की रचना कर डाली। जिनमें उन्होंने अपने आपको को देव एवं आदिवासियों को दानव के रूप में पेश किया। देव और दानव को क्रमशः सुर-असूर के नाम से भी जाना जाता है। इन्होंने भोले-भाले आदिवासियों को अपना मानसिक गुलाम बनाने हेतु कोई कसर न छोड़ी। जैसे कि आप अच्छी तरह जानते हैं कि इनके कपोल कल्पित ग्रंथ महाभारत और रामायण में तीर-धनुष की खूब बौछार हुई थी। पर सोचने वाली बात है; जिसने इन ग्रथों की रचना की, क्या उनके पास आज की तारीख में कोई छोटा-सा तीर-धनुष का टुकड़ा भी है? नहीं है। फिर यह तीर-धनुष आज किनके पास मौजूद है? इसका उत्तर आप स्वयं अच्छी तरह जानते हैं। 

दलित चिंतकों के अनुसार; डीएनए जाँच से यह सिद्ध हो चुका है कि जो लोग यूरेशिया से भारत आए, वही आज के ब्राह्मण हैं। इन ब्राह्मणों ने छल-कपट के सहारेआदिवासियों के किन्हीं राजाओं की हत्या कर दी, तो किन्हीं राजाओं को येनकेन प्रकारेण अपने कब्जे में कर लिया। ऐसा भी कहा जाता है कि जब भी ब्राह्मणों ने आदिवासी राजाओं को पराजित किया था, तब वे खुशी से झूम उठते थे। कालान्तर में यही विजय दिवस हिन्दुओं के पर्व-त्योहार के रूप में परिणत हो गया। मानवशास्त्री आगे बताते हैं कि इन ब्राह्मणों ने अपना वर्चस्व कायम करने हेतु एवं SC/ST/OBC को अपना गुलाम बनाने के लिए कई ग्रंथों की रचना कर डाली। मनु महाराज की मनुस्मृति ने तो हद ही कर दी। इन्होंने वर्ण व्यवस्था की स्थापना कर दलितों को सदा के लिए नरक की जिंदगी जीने के लिए मजबूर कर दिया।      (... अगले अंक में जारी।)

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