रोमन लिपि : परिवर्धित संताली लिपि
आखिर कोट-टाई-पैन्ट किसकी पोशाक है? नि:संदेह यह अंग्रेजों की पोशाक है। पर इस वक्त इसे दुनिया तो छोड़ो हर संताल द्वारा इसका उपयोग बड़े ही गर्व के साथ किया जाता है। इसे पहनने में किसी भी संताल को कोई गुरेज व एतराज नहीं और न ही कोई इसके विरोध में चूँ तक कर रहा है। सभी संताल इसे पहनने में अपना गौरव महसूस करते हैं। लेकिन रोमन संताली लिपि के साथ ठीक इसके विपरीत हो गया। अक्सर इनपर आरोप मढ़ दिया जाता है कि यह तो ईसाईयों द्वारा ईजाद की हुई लिपि है। अतः यह संतालों की लिपि कतई नहीं हो सकती है। यह लिपि हमें किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। हमें तो किसी संताल द्वारा ईजाद की हुई अपनी लिपि चाहिए, जिससे हम अपनी पहचान को बरकरार रखते हुए गौरव महसूस कर सकें। बेशक वह लिपि चोरी की हुई, अवैज्ञानिक एवं मानक संताली के लिये अनुपयुक्त ही क्यों न हों।
मालूम हो कि रेव्ह. पी. ओ. बोडिंग ने जिस रोमन लिपि को संताली के लिये परिवर्धित कर संताली लिखने के लिये ईजाद किया, इससे श्रेष्ठ, उत्कृष्ट एवं बेहत्तर संताली लिपि और कोई दूसरी नहीं हो सकती है। अतः इस संताली लिपि को कोई अन्य माने या न माने, अपनाए या न अपनाए, इसका विरोध करे; हमें कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए। हमें इस संताली लिपि की उन्नति के लिये हर संभव प्रयास करते रहना चाहिए। यह लिपि संताली के लिये सर्वश्रेष्ठ लिपि है।
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