बोडिंग साहब : एक महान संताल
बेशक पी. ओ. बोडिंग किसी संताल की कोख से पैदा नहीं हुए थे। वे अवश्य ही मूल रूप से एक विदेशी एवं ईसाई धर्म प्रचारक थे। पर उनकी सारी रचनाएं बेहद उम्दी, बेहतरीन, उत्कृष्ट एवं अव्वल दर्जे की हैं। उनकी किसी भी रचनाओं से किसी भी ऐंगल से विदेशी एवं ईसाई धर्म प्रचारक होने की बू नहीं आती है। उनकी ”ए संताल डिक्शनरी” को ही देख लिया जाए। उन्होंने इसमें हर शब्द की व्याख्या बड़े ही उत्कृष्ट तरीके से किया हुआ है। उन्होंने इस शब्दकोश में भाषाविज्ञान के सिद्धांतों का अक्षरश: अनुपालन करते हुए अपनी विद्वत्ता का परिचय दिया है; जो कि इस तरह का कृत्य किसी साधारण संताल द्वारा संभव नहीं है।
अतः उपरोक्त कारणों को मद्देनजर रखते हुए डंके की चोट पर कहा जा रहा है कि रेव्ह. पी. ओ. बोडिंग संतालों में महान संताल थे!
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