कैसी और किसकी आजादी (4)?
(इस लेख की शृंखला को अच्दी तरह समझ पाने के लिए निश्चित रूप से हमें 65000 वर्ष पीछे जाने की जरुरत है। इतना न भी जा पाएं, तो कम से कम इस देश में अंग्रेजों के आगमन काल के दृश्यों को तो समझना ही होगा। ब्रिटिश आगमन काल अर्थात् 1600 ई. तक देश मनुस्मृति के अनुसार चल रहा था। अंग्रेजों ने इसे धीरे-धीरे ध्वंस करना प्रारंभ किया। जब भारत देश आजाद हुआ, तब अंग्रेजों के दिखाए मार्ग पर चलते हुए बाबा साहेब डॉ भीम राव अम्बेडकर की आगुवाई में भारत का संविधान बना, जिसे 26 जनवरी, 1950 को लागू किया गया। बताते चलें कि अब वर्तमान हुक्मरानों द्वारा इस संविधान को अमान्य करार देने की योजना चल रही है एवं इसके बदले फिर से देश में मनुस्मृति लागू किए जाने की संभावना ज्यादा नजर आ रही है।)
सर्वप्रथम अंग्रेजों ने तमाम मुगल शासकों के पर उखाड़ते गए। जब बादशाह बहादुरशाह जाफर के रूप में अंतिम पर उखाड़े गए तो, भारत में पूर्णरूपेण अंग्रेजी हुकुमत कायम हो गई। अंग्रेजों को मनुस्मृति की कुरीतियों को समझने में देर न लगी। उन्होंने छुआछूत, संपत्ति का अधिकार, सती प्रथा, शिक्षा, राजनीति, प्रशासन एवं तमाम तरह के दलित, पिछड़े, आदिवासियों की हकमारी को बहुत करीब से देखा। तात्पर्य यही कि भारतवर्ष में अंग्रेजी राज नहीं, अपितु देश मनु महाराज की “मनुस्मृति” के संविधान के अनुसार चल रहा था, जो मानवाधिकार की दृष्टि से अति निंदनीय एवं निहायत ही अमानवीय था। फिर क्या था; अंग्रेजों ने धीरे-धीरे लंकारूपी “मनुस्मृति” पर आग लगानी शुरु कर दी।
चूंकि इस लेख का लेखक महोदय मूल रूप से संताल परगना का है एवं पाठकगण भी बड़ी संख्या में यहीं के हैं, अतएव ब्रिटिश काल के दौरान संतालों के साथ घटी घटनाओं का वर्णन करना ही उचित होगा। मालूम हो कि तब आज के संताल परगना में संतालों का आगमन ब्रिटिश काल के दौरान हुआ। हालांकि उस समय पहाड़ों के ऊपरी हिस्से में आदिम पहाड़ियों का वास जरुर था, पर वे निचले हिस्से में उतरने को कतई मंजूर नहीं थे। इतना ही नहीं आदिम पहाड़िया बड़े ही आलसी प्रवृति के थे, जहाँ संताल बहुत ही मेहनतकश प्राणी थे। यही कारण था कि अंग्रेजों ने संतालों को संताल परगना आने का आमंत्रण दे डाला। संताल आदिवासी टिड्डी की भाँति संताल परगना में प्रवेश कर गए। यहाँ संतालों ने जंगली जानवरों का सामना करते हुए अपने लिए खेती योग्य जमीन तैयार की। यहाँ बताते चलें कि शुरुआती दौर में पहाड़ियों ने संतालों के आगमन पर बेशक आपत्ति जरुर जताई थी, पर अंग्रेजों के हस्तक्षेप से सारा मामला सुलट लिया गया था।
तब संतालों की जीवन शैली किस तरह की रही होगी, आप इसके बारे में आसानी से कल्पना कर सकते हैं। संतालों की रहन-सहन व अन्य गतिविधि ब्रिटिश काल के दौरान भी आदि मानव की तरह ही थी। संताल लोग दुनिया से एकदम कटे हुए थे।
(... अगले अंक में जारी।)